मथुरा में 5247 साल पहले जन्मे थे कृष्ण

मथुरा। भगवान विष्णु के 22वें अवतार माने गए श्रीकृष्ण का आज दुनियाभर के हिंदु अनुयायियों में जन्मोत्सव मन रहा है।पंचाग के अनुसार, मथुरा की जेल में आधी रात को कृष्ण अष्टमी की तिथि में रोहिणी नक्षत्र के समय जन्मे थे। कुछ विद्वानों एवं वैष्णव संप्रदाय की मान्यता के अनुसार, इस बार श्रीकृष्ण का 5247वां जन्मोत्सव है। यहां आज आपको बताएंगे, कन्हैया की आठ के अंक से जुड़ी बातें।

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आठ के अंक का कृष्ण से खास ताल्लुक

1. आठवें मनुकाल में जन्मे: शास्त्रों के अनुसार, श्रीकृष्ण के जन्म से लेकर जिंदगी भर आठ के अंक का उनसे खास ताल्लुक रहा। चाहे वे स्वयं श्रीकृष्ण हों, उनकी पत्नी हों। परिवार हो अथवा उनके शत्रुओं के इर्द-गिर्द घूमते समीकरण। कहा जाता है कि, आठ का अंक श्रीकृष्ण के ताल्लुक गोलोकवास से रहा। कृष्ण का जन्म आठवें मनु के काल में हुआ था।
2. देवकी की आठवीं संतान मथुरा में अपने पिता से विद्रोह कर राजा बने राक्षस कंस ने अपनी बहन देवकी और दामाद वसुदेव को भी कैद कर लिया था। उन्हें जेल में रखा गया। इसी जेल में कृष्ण जन्मे। हुआ यह था कि, कंस के अत्याचारों से प्रजा त्राहिमाम-त्राहिमाम करने लगी थी। तब एक भविष्यवाणी कंस की मृत्यु को लेकर हुई। जिसमें कहा गया था कि, उसकी बहन की आठवीं संतान द्वारा उसका वध होगा। जिससे रुष्ट होकर कंस ने जेल में वसुदेव-देवकी पर पैहरा​ बिठा दिया।

3.अष्टमी को जन्मे थे कंस अपनी बहन के गर्भ से जन्म लेने वाली 6 संतानों को एक एक करके मार चुका था। तब 8वें श्रीकृष्ण पैदा हुए। किवदंतियां हैं कि, भगवान विष्णु ने स्वंय को साधारण इंसान की तरह आश्चर्यजनिक रूप से कृष्ण के अवतार में पृकट किया था। वे देवकी की आठवीं संतान के रूप में अष्टमी को अवतरित हुए। तब से लोग अष्टमी को कृष्ण जन्माष्टमी के तौर पर मनाने लगे।

4. आठ सखियां द्वापर युग में ब्रजभूमि के कई गांवों में कृष्ण का बचपन गोपी-गोपिकाओं के साथ बीता। ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, कृष्ण के 8 सखियां ज्यादा करीब थीं। जिनके नाम हैं- चन्द्रावली, श्यामा, शैव्या, पद्या, राधा, ललिता, विशाखा और भद्रा। इनमें राधा का नाम श्रीकृष्ण के साथ हमेशा के लिए जुड़ गया।

5. आठ पटरानियां श्रीकृष्ण रंग-रूप से भी अत्यंत सुंदर थे। उन्होंने कई विवा​ह किए। एक वक्त ऐसा भी आया कि, जब उन्होंने अपनी बाललीलाओं से परे जाकर 16 हजार कन्याओं काे राक्षसों की कैद से मुक्त कराया था। तब वे 16 हजार कन्याएं श्रीकृष्ण को ही अपना सबकुछ मान बैठीं। श्रीकृष्ण के आठ रानियां थीं, जिनसे उनकी शादी हुई। इनमें रुक्मिणी, जाम्बवंती, सत्यभामा, मित्रवंदा, सत्या, लक्ष्मणा, भद्रा और कालिंदी शामिल हैं। लोगों की नई पीढ़ी ऐसा मानती है कि राधा भी श्रीकृष्ण की पत्नी थीं। लेकिन ऐसा नहीं है, राधा कृष्ण का रिश्ता भक्त-परमात्मा के जैसा रहा।

5. आठ प्रमुख नाम वैसे तो श्रीकृष्ण को भक्त काफी नामों से पुकारते हैं। मगर, उनके 8 नाम ही ज्यादा चलन में रहे- नंदलाल, गोपाल, बांके बिहारी, कन्हैया, केशव, श्याम, रणछोड़ दास, द्वारिकाधीश और वासुदेव। इनके अलावा भक्तों ने और नाम भी रखे जैसे- मुरलीधर, माधव, गिरधारी, घनश्याम, माखनचोर, मुरारी, मनोहर, हरि, रासबिहारी आदि।

6. आठ चिह्न सुदर्शन चक्र, मोर मुकुट, बंसी, पितांभर वस्त्र, पांचजन्य शंख, गाय, कमल का फूल और माखन मिश्री। ये आठ चीजें श्रीकृष्ण को अत्यंत प्रिय थीं। बचपन से लेकर पूर्ण पुरुष तक श्रीकृष्ण का इन आठों से खास ताल्लुक रहा।

7.आठ नगर श्रीकृष्ण अपने जन्म के बाद से वापस अपने धाम लौटने तक कई नगरियों में रहे। मगर ये स्थल कृष्ण-स्थली कहे गए हैं-गोकुल, नंदगांव, वृंदावन, गोवर्धन, बरसाना, संकेत, मथुरा और द्वारका। ये स्थल श्रीकृष्ण की लीलाओं के लिए जाने जाते हैं।

8. आठ महादैत्य थे श्रीकृष्ण के शत्रु कंस, जरासंध, शिशुपाल, कालयवन, पौंड्रक, बाणासुर, भौमासुर। ये सभी राक्षस-राजा थे। इनमें कंस श्रीकृष्ण का मामा था। जरासंध कंस का ससुर था। शिशुपाल कृष्ण की बुआ का लड़का था। कालयवन यवन जाति का मलेच्छ था जो, जरासंध का मित्र था। पौंड्रक काशी नरेश था, जो खुद को विष्णु का अवतार मानता था।

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